शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) एम.पी.थ्री. में Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly





आज से लगभग 14 महीने पहले मैनें आप लोगों को एक तोह्फ़ा दिया था। मैनें कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) एम.पी.थ्री. फ़ोर्मेट में  आपके सबके सामने पेश किया था । उस अनुवाद की .mp3 फ़ाइल्स में एक परेशानी थी की उनकी Playlist अपने आप नहीं बनती थी उसको बनाने के लिये काफ़ी मेहनत करनी पडती थी और सबसे ज़्यादा परेशानी मोबाइल में इस्तेमाल करने में आती थी। अलग-अलग फ़ोल्डर से फ़ाइल्स को सलेक्ट करना होता था और फ़िर उसकी playlist बनती थी। इससे काफ़ी झुंझलाहट होती थी।


पुरे एक साल की मेहनत के बाद मैनें ये सारी परेशानियां दुर कर दी हैं। मैने इस अनुवाद को सात टुक्डों ZIP File की शक्ल मे इन्टरनेट पर अपलोड किया है। इन सातों टुकडॊं को आप यहा दिये गये लिन्क के द्वारा अपने कंप्युटर मे डाउनलोड कर ले। फिर इन्हे UNZIP कर के इन सब फ़ाइल्स को एक फ़ोल्डर में कापी करे और उसके बाद फ़ोल्डर में राइट क्लिक करके ARRANGE ICONS BY > NAME पर क्लिक करे




  इसके बाद आसानी से सबको एक साथ सलेक्ट करे और आसानी से प्ले लिस्ट बना कर सुने, इस तरह से आप बिना किसी आयत और उसके अनुवाद को छोडे बगैर आसानी से पुरा कुरआन सुन और समझ सकते है।  इस्मे पहले कुरआन की आयत की तिलावत कि गयी है फिर उसका अनुवाद किया गया है।  इस तर्जुमे मे आयत नंबर नही दिया है क्यौंकी आयत नंबर देने के बाद ये एक सही सीरियल से आपके .MP3 Player कि Playlist मे नही चलेगा। इसीलिये इसे अलग नंबर दिये हुए है लेकिन जहां कोई नया पारा (अध्याय) या नयी सूरह  शुरु हो रही है वहा - वहा उस पारा (अध्याय) सूरह का नाम दिया गया है।

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - १ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-1

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - २ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-2

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - ३ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-3

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - ४ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-4

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - ५ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-5

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - ६ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-6

कुरआन का हिन्दी अनुवाद (तर्जुमा) भाग - ७ Download Quran Hindi Translation in .MP3 Format Playlist Friendly Part-7


अल्लाह आप सबको कुरआन पढ कर और सुनकर, उसको समझने की और उस पर अमल करने की तौफ़िक अता फ़रमाये।

आमीन, सुम्मा आमीन 

अगर लेख पसंद आया हो तो इस ब्लोग का अनुसरण कीजिये!!!!!!!!!!!!!

"इस्लाम और कुरआन"... के नये लेख अपने ई-मेल बाक्स में मुफ़्त मंगाए...!!!!

4 टिप्‍पणियां:


  1. मुस्लिम शक्ल के साथ-साथ, अक्ल से भी बेवकूफ क्यों होते हैं..?
    क्या आपने कभी इस बात पर गहराई से सोचा है कि........ मुस्लिम चोरी, लूटमार, और बेईमानी पर आखिर इतना भरोसा क्यों करते हैं...????

    आपको यह जान कर काफी हैरानी होगी कि ... उन्होंने अपना धर्म से लेकर धर्मस्थान (काबा, जामा मस्जिद वगैरह) तक... चोरी से ही बनाई है.....!

    और तो और... उन्होंने तो देश तक ( पाकिस्तान, बांग्लादेश वगैरह ) बेईमानी से बना रखी है..!

    हद तो यह है कि.... उन्होंने मशहूर कब्रें तक भी लूट कर ही बनाई है (ताजमहल) ...!

    तो.. किसी के भी मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक ही है कि ....आखिर इन सबका कारण क्या है.... और ये हर चीज लूट कर और बेईमानी कर के ही क्यों लेते हैं...... खुद का क्यों नहीं बनाते......????

    दरअसल.... इन सबका धार्मिक आधार होने के साथ साथ........ वैज्ञानिक आधार भी है.....!

    सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि.... कहीं भी .. कुछ भी... नया बनाने के लिए सबसे पहले दिमाग की जरुरत होती है.... जो कि इन बेचारों के पास होती ही नहीं है.....!

    अब मुस्लिम शक्ल के साथ-साथ, अक्ल से भी बेवकूफ क्यों होते हैं ... इसका एक भी एक ठोस वैज्ञानिक आधार है....!

    ये बात तो सर्वविदित है और अब वैज्ञानिकों द्वारा भी प्रमाणित है कि ....
    जिस समुदाय में अपने ही घर की मादाओं से शादी की जाती हो.... उस समुदाय का मानसिक विकास नहीं हो पाता है...!

    क्योंकि.... उसमे माता-पिता का गुणसूत्र (डीएनए) एक ही होता है...! उदाहरण के लिए मान लो कि.... किसी ने चचेरे या मौसेरे बहन से शादी कर ली (जो कि मुस्लिम अक्सर करते हैं) .. तो उनके नाना/दादा के गुणसूत्र एक ही हो जाते हैं और बच्चे का मानसिक विकास नहीं हो पाता है... और, ये बात जगजाहिर है कि.... मुस्लिमों में पवित्र या अपवित्र रिश्ता जैसा कुछ भी नहीं होता है.... उन्हें सिर्फ बच्चा पैदा करने से मतलब होता है ... चाहे वो अपनी बहन से करे, माँ, बुआ अथवा चाची से...! (यही कारण है कि .. मुस्लिमों को मदरसे में कुरान रटाया जाता है, ना कि समझाया जाता है) .
    वहीँ दूसरी तरफ.... हिन्दुओं में शादी, अपने रिश्तेदार तो खैर भूल ही जाओ.... पिछले सात पुश्तों तक को देख कर की जाती है.... परिणामस्वरुप माता-पिता के अलग-अलग गुणसूत्रों (डीएनए) के कारण आने वाले हिन्दू बच्चे में मानसिक विकास का दर काफी उच्च श्रेणी का होता है ...!
    और , शायद ये बात मुस्लिम भी समझते हैं कि ... वे तो मुर्ख हैं ही.. उनकी आने वाली नस्लें भी मुर्ख ही पैदा होनी है ....
    इसीलिए .... मुस्लिम चोरी, लूटमार, और बेईमानी पर ही आश्रित होते हैं .... और उसी को अपने जीवन का एक मात्र सहारा मानते हैं...!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. Kya kiya gya tha jab puri duniya me ek hi insaan ki aulaade paida thi .
      Kya uss waqt ladkiya tumne unhe shadi ke liye di.
      Jab tumhe pta h ki uss waqt unka aapas me hi vivaah hua to tum kyu jhuthlaate ho iss baat ko.

      हटाएं
    2. Kya kiya gya tha jab puri duniya me ek hi insaan ki aulaade paida thi .
      Kya uss waqt ladkiya tumne unhe shadi ke liye di.
      Jab tumhe pta h ki uss waqt unka aapas me hi vivaah hua to tum kyu jhuthlaate ho iss baat ko.

      हटाएं

आपको लेख कैसा लगा:- जानकारी पूरी थी या अधुरी?? पढकर अच्छा लगा या मन आहत हो गया?? आपकी टिप्पणी का इन्तिज़ार है....इससे आपके विचार दुसरों तक पहुंचते है तथा मेरा हौसला बढता है....

अगर दिल में कोई सवाल है तो पुछ लीजिये....

Related Posts with Thumbnails