शरीअत मे जन्म दिवस मनाने की कोई अस्ल (दलील) नहीं है, बल्कि यह बिदअत है। नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिंं वसल्लम का फ़रमान है :- "जो शख्स हमारे इस दीन मे कोई नई चीज़ ईजाद करे तो वह रद्द है" (वह गलत है) मुस्लिम, अबू दाऊद, इब्ने माज़ा, अहमद)
यह बात निश्चित है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहिंं वसल्लम ने अपने जीवन में न तो खुद जन्मदिन मनाया और न ही इस का हुक्म दिया। इसी प्रकार चारों खलीफा और तमाम सहाबा ने भी आप सल्लल्लाहु अलैहिंं वसल्लम के जन्म दिन का आयोजन नहीं किया, हालांकि लोग आप सल्लल्लाहु अलैहिंं वसल्लम की सुन्नत के सबसे बडे आलिम और सबसे बढ कर उससे मोह्ब्बत करने वाले और सबसे ज़्यादा इस्लामी शरीअत की पैरवी करने वाले थे।
जन्मदिन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जन्मदिन लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 30 मई 2009
सदस्यता लें
संदेश (Atom)