बुधवार, 18 अगस्त 2010

इस्लामी अकीदे से जुडें कुछ सवाल भाग - 1, Islam, Allah, Muslim, Jihad, Namaz, Pray, Ibadat,

आज आप लोगों के सामने मैं कुछ सवाल रख रहा हूं जो अकसर मुस्लिम और गैर-मुस्लिम भाई इस्लाम के विषय में पुछते है। हर सवाल के जवाब से साथ कुरआन और हदीस से दलील भी पेश की गयी..।
                         1.

सवाल :-     अल्लाह तआला ने हमें किस लिये पैदा किया है ?

जवाब :-     अल्लाह ने हमें सिर्फ़ अपनी इबादत के लिये पैदा किया है।

कुरआन से दलील :-    मैंने इंसानों और जिन्नातों को सिर्फ़ अपनी इबादत के लिये पैदा किया है । (सूरह 
                                    अज़्ज़ारियात सु. 51 : आ. 56 )

हदीस से दलील :-       बन्दों पर अल्लाह तआला का हक यह है कि वह उसकी इबादत करें और उसके साथ
                                    किसी को शरीक न करें । (मुत्तफ़क अलैह)



2.

सवाल :-                         हम अल्लाह की इबादत किस तरह करें ?

जवाब :-                         अल्लाह और उसके रसूल के फ़रमान के मुताबिक खुलूस के साथ ।

कुरआन से दलील :-       और उनको यही हुक्म किया गया कि (कुफ़्र-शिर्क छोड कर) एक रुख होकर अल्लाह
                                       ही की मुख्लिसाना इबादत किया करें और नमाज़ पढें और ज़कात अदा करें । (हमारे नज़दीक) दीने-कय्यिम (मुहकम तरीका) यह हैं । (सूरह बय्यि न: सु. 98 : आ. 5 )


हदीस से दलील :-          जिसने कोई ऎसा काम किया जो हमने नहीं किया वह मरदूद है। (मुस्लिम)

3.

सवाल :-                          क्या हम अल्लाह की इबादत डर और लालच के साथ करते हैं?

जवाब :-                          हां! हम अल्लाह की इबादत डर और लालच के साथ करते हैं।

कुरआन से दलींल :-       और पुकारों उसको खौफ़ और लालच के साथ। (सुरह अआराफ़ सु. 7 : आ. 56)

हदीस से दलील :-            मैं अल्लाह से जन्नत का सवाल करता हूं और जहन्नम से पनाह मांगता हूं।
                                        (अबूदाऊद)

4.

सवाल :-                          इबादत में एहसान का क्या मतलब है?

जवाब :-                          एहसान कहते हैं इबादत में अल्लाह की निगरानी की पूरी सोच और यकीन को।

कुरआन से दलील :-        बेशक अल्लाह तुम्हारा निगहबान है। (सूरह निसा सू. 4 : आ. 1)

हदीस से दलील :-            एह्सान यह है कि तुम अल्लाह की इबाद्त इस तरह करो जैसे तुम उसे देख रहे हो
                                        और अगर तुम नहीं देखते तो वह तुम्हे देख रहा है। (मुस्लिम)



क्रमश: अगले भाग में जारी


अल्लाह हमें और आपको कुरआन, हदीस पढने, समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीफ़ अता फ़रमायें|

आमीन, सुम्मा आमीन 




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