रविवार, 15 नवंबर 2009

इस मिट्टी और इस ज़मीन को पुजते हो तो इसमें दफ़न क्यौं नही हो जातें..!!!! If You Worship This Country This Soil So Why You Not Graved In This Soil???

मैनें अपने पिछ्ले लेख "एक भी भारतीय मुस्लमान देशभक्त नही है" में मुस्लमानों के "वन्दे मातरम" ना गाने की वजह बताई थी मेरे उस लेख को पढकर मेरा एक बहुत करीबी दोस्त जो  "आगरा की शिवसेना ईकाई का सदस्य" है ये लोग अपने आप को देशभक्त और देशप्रेमी कहते है जबकि (मुझे आज तक इनमें कोई देशभक्त और देशप्रेमी नही मिला बल्कि शहर के सारे गुण्डे-बदमाश शिवसेना और बंजरग दल के सदस्य होते है)

बरहाल मेरा दोस्त जिसका मेरा साथ पिछले नौ सालों से है मुझसे झगडने लगा....कहने लगा की तेरी हिम्मत कैसे हुई ये सब लिखने की? जो "वन्दे मातरम" नही गा सकता वो अपने देश से प्यार नही करता। अगर इस देश में रहना है तो वन्दे मातरम गाना पडेगा वर्ना तुम गद्दार कह लाओगे और गद्दारों के लिये इस देश में जगह नही है तुम ये देश छोडकर जा सकते हों.......वगैरह वगैरह... (वही बातें जो इनके जैसे "कथित देशभक्त" लोग अकसर कहते है)



मैनें उसकी सब बातें सुनने के बाद उससे कुछ सवाल किये जो सुनने के बाद वो बगले झांकने लगा....उसके पास कोई जवाब नही था तो वो बात को अधुरा छॊडकर बगैर कोई जवाब दिये वहां से निकल गया....

वही सवाल मैं आप लोगों से पुछता हूं देखें आप लोगों में से शालीन तरीके से इसका जवाब कौन देता है...(इस्लाम और कुरआन को गाली दे वाले इससे दुर रहें) 

जब आप अपने देश को "भारत माता" कहते हो तो अपनी मां के सीने में दफ़न क्यौं नही होते हो??


क्यौं "भारत माता" के सीने में दफ़न होने के बजाय "गंगा मैया" में तुम्हारी अस्थियां बहाई जाती है??

कहते हो ये शरीर पांच तत्वों से बना है जिसमें ये मिट्टी भी शामिल है तो सिर्फ़ अग्नि के हवाले अपना शरीर करते हो और अस्थियां गंगा या और किसी नदी में बहा देते हो तो बाकी और तीन तत्वों का क्या????? इनको क्यौं छोड दिया???

क्यौं कोई फ़ौजी या भारत माता का सच्चा सपुत या इस देश का सच्चा देशभक्त शहीद होने से पहले इस देश की मिट्टी में समाने की इच्छा ज़ाहिर नही करता है???

क्यौं किसी देशभक्त या देश के लिये शहीद होने वाले को देश की मिट्टी में दफ़नाया नही गया??

क्यौं तुम्हारी अस्थियां उस गंगा नदी में बहाई जाती है जो तुम्हारी अस्थियों को बहाती हुई "हमारे देश के दुश्मन और आस्तीन के सांप बाग्लांदेश" में ले जाती है????

जबकि इसका उल्टा मुस्लमान अपने देश की मिट्टी में ही दफ़न होता है....वो जहां पैदा होता है, जहां खाता है जो मिट्टी उसको रोज़ी-रोटी-मकान सब कुछ देती है वो उसी मिट्टी में मिल जाता है.... ना पेड कटा, ना कोई प्रदुषण हुआ, ना नदी का पानी गन्दा हुआ.......जिस मिट्टी से बना था उसी मिट्टी में मिल जाता है....

अब देशप्रेम किस का ज़्यादा हुआ????


अगर लेख पसंद आया हो तो इस ब्लोग का अनुसरण कीजिये!!!!!!!!!!!!!


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43 टिप्‍पणियां:

  1. काशिफ साब,
    पता नही आपने बंदेमातरम को लेकर बहश करते -करते क्या -क्या कह दी। आपको सायद इतिहाश का ज्ञान कम है या फ़िर इतिहाश को भूल गए है की बंदेमातरम ही वो सब्द है जिसे सभी ने एक स्वर में गाकर आजादी प्राप्त की थी फ़िर क्या हिंदू क्या मुशलमान क्या इसी या फ़िर अलग धर्मं को मानने वाले । सच तो ये है की हमें आपने आजादी का मतलब ही नही पता, बस १५ अगस्त को लाल किले पर झंडा फहरा देना और बात ख़तम। हाँ अपने एक बात तो ठीक लिखी है की बन्दे मातरम को गाने से ही सच्चा देशभक्त नही कहलाया जा सकता, बल्कि आप देशभक्त तब हो सकते है जब आप अपने देश के प्रति जिम्मेदारियो को सही तरीके से पूरी करे।
    आपने दूसरी बात लिखी है की हिंदू मिटटी में क्यों नही दफ़न हो जाते?
    आप ही बताइए की मिटटी में दफ़न होना और मिटटी में मिल जाना दोनों में कितना अन्तर है? आपकी या आपके धर्मं की मन्न्यातय अलग है और हिंदू मन्न्यातय अलग है ये बहश का मुद्दा हो ही नही सकता।
    फ़िर आपने कहा की मुस्लिम को जहा से रोजी रोटी मिलती है, घर मिलता है , काम मिलता है वो वोही दफ़न होते है, तो दूसरी तरफ़ उन्हें जहा से ये सब मिलता है वो उसी से गद्दारी भी करते है। इस बिषय में आप क्या कहेंगे? येह भी फर्क उसकी सोच का है ना की उसके धर्म का। क्योंकि किशी का धर्म अपने मात्रभूमि से गद्दारी नही सिखाता।
    जाते -जाते एक बात और कहूँगा फर्क यहा इन्शान और उसके सोच का है न की हिंदू और मुशलमान का।

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  2. जमीन रहने के लिये ही कम पड़ रही है सो हिंदू की फौर साईट देखिये की दफ़न होने की जगह जलना पसंद हैं । यही हैं अपनी जमीन से सच्चा प्यार की अपनी नहीं दुसरो की भी फ़िक्र रहती हैं और आने वाली नस्लों की भी । हम जमीन से प्यार नहीं करते हम वंदना करते हैं अपनी मात्र भूमि की

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  3. बन्द करो ये फलतु के बकवास । अरे जो जीते जी देशभक्ति नहीं कर सकता वह मरनें के बाद क्या करेगा खाक । जो ना गायें वन्दे मातरम वह देश का गद्दार है। और आप ही बताईये गद्दार क्यों ना कहा जाये उसे। अरे जरा अपनी आँखे और दिमाग खोलो ध्यान से सूनों, जिस देश में रहते हो जहाँ की खाते हो जहाँ की पहनते हो, जिस देश नें तुम्हे सर ढकने के लिए छत और सोने के लिए जमीन दी , उसको समर्पित दो शब्द कहने की बारी आयी तो ये कहके इंकार करना कि ये धर्म विरोधी है। तो एक बार फिर मैं कहता हूँ ऐसे लोगो को डुब मरना चाहिए वहाँ जहाँ सुखा पड़ा हो, चूल्लु भर पानी भी ज्यादा है इनके लिए। मैं ये नहीं कहता कि ये बस मुस्लिम पर लागू हो, बल्कि हर उस शख्स के लिए जो भारत माता को इज्जत देने से इंकार करता हो। ये बात ठिक है कि आपके धर्म में मुर्ति पूजन नहीं माना जाता तो आप पूजा ना करिए, उसके लिए आपसे कोई जोर जबरजस्ती नहीं कर रहा है, लेकिन ये कहना की ये धर्म विरोधी है तनिक भी ठिक ना होगा। बात साफ है हो सकता बहुत दिनों से बहुत से लोग इस गान का विरोध कर रहे हों, लेकिन प्रत्यक्ष रुप से अब हो रहा है। ये भी ठीक है कि वन्दे मातरम कहने मात्र से कोई देशभक्त नहीं बन जाता , आप देश में रहकर देश के लिए कुछ भी भला मत करिये, लेकिन जैसे ही आप देश के विरोध में कुछ करेंगे तो आपको देशद्रोही तो कहा ही जायेगा। अगर देश के लिए कुछ कर नहीं सकते तो कम से कम उसका विरोध मत करिये।

    अगर आप के बातो को देखा जाये तो इस मामले में पारसि सबसे बड़े देशभक्त होगे, क्योंकी उनके यहाँ तो ये प्रचलन है कि मरने के बाद लाशो को खुले स्थान में छोड़कर लाशों को गिद्ध और कौओ से खिलाया जाता है, और ये पंक्षि इसी देश मे रहते है और देश कि सेवा करते रहते है, अब पंक्षी कितने काम के होते है ये सब को पता है। अब इनके लहजे में अगर इनको जवाब दिया जाये तो, हिन्दू मरने के बाद जब विसर्जित होते है, इसका कारण है। हम जब तक जीते है देश की सेवा करते हैं और मरने के बाद देश छोड़ देते है, वहीं तुम्हारे यहाँ तुमको दफना दिया जाता है और मरने के बाद भी देश पर बोझ बने रहते हो। हम मरने के बाद गंगा में बहा दिये जाते है, और तुम्हारे यहाँ दफनाया जाता है। दफनाने के बाद उस जगह पर कब्जा कर लेते हो, वहीं अगर दफनाये न जाते तो वह जमीन खेती के काम आती और देश सुखी बनता, अब बताओ कौन हुआ देश भक्त और कौन है गद्दार।

    अब जरा बताईयेगा कौन हुआ देशभक्त ?????????????????

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  4. .
    .
    .
    भाई काशिफ आरिफ,

    बंदा मर गया...२४ से ४८ घंटे के भीतर लाश अगर डिस्पोज न की तो सड़ने(decompose होने) लगेगी... अंतिम संस्कार महज इसीलिये है... अब मरने के बाद लाश को चाहे जलायें... चाहे दफनायें... समंदर या नदी में वजन बाँध कर डुबायें... या फिर पारसियों की तरह गिद्ध और कौवों को खिलायें... बात तो एक ही होगी।
    देशभक्ति या देशप्रेम जिन्दा इन्सान का भाव है... मुर्दा तो अपने को सड़ने से ही नहीं बचा पाता... देशभक्ति क्या खाक करेगा ?

    फिर आप लिखते हो:-
    "क्यौं किसी देशभक्त या देश के लिये शहीद होने वाले को देश की मिट्टी में दफ़नाया नही गया??
    सोचो मेरे भाई, हिन्दुस्तान के लिये जो ईसाई और मुसलमान फौज, पैरामिलिट्री और पुलिस में अपना फर्ज निभाते हुऐ वीरगति को प्राप्त होते हैं उनका अंतिम संस्कार कैसे होता है ? तुम्हारा यह लेख तो ऐसा इम्प्रैशन दे रहा है मानो या तो कोई इसाई और मुसलमान देश के लिये शहीद ही नहीं हुआ या फिर उन्हें गैर मुल्क में दफनाया गया।

    अब बात करें आज के दौर की... समय रहते अगर इन्सान के मरने का पता चल जाये... तो मेरे लिहाज से सबसे अच्छा तरीका है... MULTIPLE ORGAN DONATION... आंख, गुर्दे, लिवर, दिल, बाल, चमड़ी, दिल, बोन मैरो, फेफड़े... सब कुछ तो दान हो जाता है आजकल... यानी परफेक्ट रिसाइकलिंग... बाकी जो कुछ बचे उसकी खाद बनाई जा सकती है... भारत माता उस खाद से पोषित फूलों से और सुन्दर दिखेगी।

    सच कहूँ तो इस तरह के कुतर्क की तुमसे कतई उम्मीद नहीं थी इस तरह के फिजूल तर्क कर तुम इस्लाम विरोधियों को ही शक्ति दे रहे हो।

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  5. भाई १४% के लिये तो इतने कब्रिस्तान बनाने पडे . अगर ८६% भी गडने लगे तो पूरा हिन्दुस्तान भी कम पडेगा

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  6. "If You Worship This Country This Soil So Why You Not Graved In This Soil???"

    ये कौन सी अंग्रेजी है? अंग्रेजी नहीं आती तो कोई बड़ी बात नहीं; उर्दू में लिखो या लिखो ही मत।

    दूसरी बात "दाढ़ी बढ़ाना", मूँछ मुड़ाना; लम्बा कुर्ता और छोटा पायजामा पहनना; दफनाये जाना; १/२ कराना; नली-वाला लोटा से पानी पीना; एक-थाली में पाँच खाना; मूतने के बाद 'ईंट से पोंछना' " आदि-आदि धर्म और दर्शन नहीं हैं - ये प्रथाएं हैं;धिक से अधिक इनको संस्कृति कह सकते हो।

    "धर्म" इनसे बहुत उपर की चीज है।

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  7. इतनी संकुचित सोच के साथ भी कोई विचारक बनने का दावा करे तो इसे घोर अन्धेरगर्दी ही कहना चाहिए। आरिफ़ साहब कुछ पढ़ा लिखा करो तो मन की आँखों पर बँधी पट्टी खोल पाओगे।

    धर्म के नाम पर आडम्बर और बकवास को जायज ठहराना कहीं से ठीक नहीं है। लानत भेंजता हूँ ऐसी सोच पर।

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  8. वाह काशिफ भाई, साबित कर दिया देशप्रेम हमारा ज़्यादा हुआ,बधाई, शालीन तरीके से जवाब देने वाला 20 के बाद बात करेगा, याद रहे आपसे बडी आशाये हैं

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  9. काशिफ मियां, इस बकवास की उम्मीद आपसे नहीं थी... ये तो वही बात हुई के....... खैर जाने दीजिये..

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  10. ऐसे ही मुद्दों पर लिखने के लिये लिखते हो क्या ? यार कुछ तो अच्छा लिखो धर्म से ऊपर उठकर।

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  11. अभी आप के लिए आगरा का पागल खाना मुफीद रहेगा , आप अपनी तश्रीफ़ यहाँ से उठा कर वहा ले जाये तो इस से बड़ी देश भक्ति की बात आप के लिए और कोई नहीं हो सकती , कम से कम तुम जैसे लोगो के ना रहने से हिन्दू मुस्लिम दंगे तो नहीं होगे

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  12. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  13. "एक बहुत करीबी दोस्त जो "आगरा की शिवसेना ईकाई का सदस्य" है ये लोग अपने आप को देशभक्त और देशप्रेमी कहते है जबकि (मुझे आज तक इनमें कोई देशभक्त और देशप्रेमी नही मिला बल्कि शहर के सारे गुण्डे-बदमाश शिवसेना और बंजरग दल के सदस्य होते है)"

    वाह, काफी ऊँची विरादरी में उठते बैठते हो जनाव !

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  14. janab chutiyape ki bhi had hoti lekin aap woh had ko bhi laangh gaye.
    i wanna requst u, kindly dont wright in english if u dont know how to wright and what to wright.
    i am fully agree with subu, rachana , p.c. godiyal,Mithilesh dube, praveen shah
    dheeru singh ,anunad singh,syed,tripathi ji and last but not least a person who is telling u ,ur right place amit jain

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  15. bhut sahi lekh

    idhar main net par kam aa sakunga kyun ki mujhe ek BADE MAQSAD ko anjaam dena hai .

    insha ALLAH kaam pura hote hi wapas aa jaunga

    khuda hafiz

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  16. kashif jab ye kahte hain loving jehaad jab ye kahte hain aatankwadi jab ye aarop lagate hain to thik... agar aapne jawab bhi de diya to peeth dikha kar aise bhagte hain ki-aap dharm se upar uth kar baatein karo. hai na doglapan

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  17. आप अपने उद्देश्य से भटक गए हैं , आपके ब्लाग पर लिखा
    है-इस्लाम और कुरान के बारे में फैली हुयी गलतफहमियां
    दूर करने के लिए ,लेकिन आप अपने ब्लाग पर तो हिन्दू
    धर्म का मजाक उड़ाते हैं | पहले आप अपना घर दुरुस्त
    करें (लोगों के सवालों का सही जवाब देकर , गोलमोल
    जवाब नहीं ) , इस तरह आप जरूर इस्लाम और कुरान
    के हितों की रक्षा कर पाएंगे | किसी धर्म का मजाक उडाने
    से आप का धर्म बड़ा नहीं हो जाता यही बात अन्य धर्म
    वालों पर भी लागू होती है |

    उत्तर देंहटाएं
  18. आप अपने उद्देश्य से भटक गए हैं , आपके ब्लाग पर लिखा
    है-इस्लाम और कुरान के बारे में फैली हुयी गलतफहमियां
    दूर करने के लिए ,लेकिन आप अपने ब्लाग पर तो हिन्दू
    धर्म का मजाक उड़ाते हैं ?????

    अविधिया चाचा
    जो कभी अवध ना गया

    उत्तर देंहटाएं
  19. मेरा एक बहुत करीबी दोस्त जो "आगरा की शिवसेना ईकाई का सदस्य" है ये लोग अपने आप को देशभक्त और देशप्रेमी कहते है जबकि (मुझे आज तक इनमें कोई देशभक्त और देशप्रेमी नही मिला बल्कि शहर के सारे गुण्डे-बदमाश शिवसेना और बंजरग दल के सदस्य होते है)

    अक्सर बडे बुजुर्गों से कहते सुना है कि "किसी इन्सान के व्यक्तित्व का सही मूल्याँकन उसकी संगति से ही किया जा सकता है" यानि की जैसी संगत,वैसी रंगत ।
    वैसे हो सकता है शायद आप अपवाद हों, और आप पर उन गुडे,बदमाशों की संगत का कुछ प्रभाव न पडा हो :)

    उत्तर देंहटाएं
  20. @ SUBU जी,

    अल्लाह का करम है उसका एहसान है इतिहास की काफ़ी जानकारी है और मैं इतिहास भुला नही हूं...मुझे मालुम है की "वन्दे मातरम" की अहमियत क्या है....

    जब आप जैसे लोग हमारे इस्लाम के बारे इतनी बात कह रहे हो तब कुछ नही है...सिर्फ़ एक गाने को ना गाने की वजह से सारे मुस्लमानों को आप जैसे लोगों ने "गद्दार" घोषित कर दिया....

    और मैनें कुछ सवाल कर लिये तो दर्द होने लगा???? अब आपको अपने धर्म की मान्यतायें याद आने लगी?????

    दुनिया जानती है की इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नही है फ़िर भी ज़बरद्स्ती अपने देश को "भारत माता" कहने और उसकी वन्दना करने पर मजबुर किया जा रहा है

    तब आपको कुछ याद नही आया....??? क्यौं..

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  21. @ मिथलेश जी,

    कुछ चुबा ना....तकलीफ़ हुई?? अजीब सा लगा?? बहुत गुस्सा आया?? दिल किया कि काशिफ़ अभी सामने आ जाये और मैं उसके सीने पर चढ जाऊ???

    यही लगता है की जब कोई अपने धर्म, अपने मज़हब, अपने विश्वास पर ऊंगली ऊठाता है.....

    वाह जी वाह...दुनिया भर के इल्ज़ाम लगा दिये...गद्दार कह दिया..ज़बरद्स्ती कर रहे हो की "वन्देमातरम" गाना होगा....फ़िर कह रहे हो की हम ज़बरद्स्ती नही कर रहे है==== ये तो वही बात हुई==="उल्टा चोर कोतवाल को डांटे"

    सब कुछ कहते जा रहे हो की "वन्दे मातरम" कहने से कोई देशभक्त नही बन जाता लेकिन तुम्हे कहलवाना भी है वर्ना हम गद्दार है......

    साफ़-साफ़ कहो जो कहना है ये दोगुलों की तरह बातें क्यौं कर रहे हो???

    मैं मानता हूं की हम उस जगह को घेर लेते है 7-8 महीनों में जिस्म ज़मीन में मिल जाता है

    लेकिन तुम्हारे यहां जब जलाया जाता है तो एक चिता में 300-400 किलों लकडी जलाई जाती है... अब ये लकडी लाने के लिये 10-12 साल पुराना पेड काटा जाता है, फ़िर चिता की आग का प्रदुषण जो बरसों तक हवा में रहता है,

    मतलब हम जब इस दुनिया से जाते है तो हमारे निशान 7-8 महीने मे खत्म हो जाते है......

    लेकिन जब आप जाते हो तो तुम्हारे बरसों तक रहते है, सबसे बडा नुकसान तो पेड काटकर कर जाते हो जिसको भरने के लिये 10-12 साल चाहियें......

    पारसी जब लाश को बाहर छोडते है तो उस लाश के आसपास का दो किलोमीटर का इलाका तो बेकार हो गया क्यौंकि जब तक उस लाश की हड्डियों में गोश्त रहेगा तब तक वो बदबु करता रहेगा...

    बदबु, गन्दगी, बीमारी फ़ैलने का खतरा, आने-जाने वालों को परेशानी, यानि हमारे देशवासियों को परेशानी....

    तो देशभक्त और देशप्रेमी कौन हुआ???

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. श्रीमान् आरिफ जी

      ’दुनिया जानती है की इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नही है फ़िर भी ज़बरद्स्ती अपने देश को ष्भारत माताष् कहने और उसकी वन्दना करने पर मजबुर किया जा रहा है’

      आपके इन वचनों से स्पष्ट होता है कि केवल भारत में ही इस्लाम के तहत् स्वाराष्ट्र से प्यार(राष्ट्र वंदन) कुअरान (इस्लाम) के खिलाफ है।
      अतः हम ये कैसे मान लें कि आप देश प्रेमी(देशभक्त) हैं।
      इसके ठीक बिपरीत
      हम अपने राष्ट्रहित(रक्षा)के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इसके लिए किसी पुस्तक(धर्मग्रंथ) के आदेश की आवश्यकता नहीं है।
      मानते हैं कि सनातन धर्म में आपको कमियां नजर आतीं हैं पर इनको दूर किया जा सकता है।
      क्योंकि यह समय के साथ परिवर्तनीय है।
      इसमें ब्यक्ति को पूर्ण स्वतंत्रता है।
      पर इस्लाम में ऐसी स्वतंत्रता नहीं हैं।

      रही बात दफन होने की तो
      दफन होने से आपके अनुसार
      ’मैं मानता हूं की हम उस जगह को घेर लेते है 7.8 महीनों में जिस्म ज़मीन में मिल जाता है’

      परंतु
      वहां पर अस्थ्यिां शेष रह जातीं हैं और वहां पर किसी दूसरे को नहीं दफनाया जा सकता है।जिससे वह एरिया ही बेकार हो जाता है ।
      इसके विपरीत
      एक एक करके कई लोगों को एक ही जगह जलाया जा सकता है जिससे इसका एरिया सीमित रखा जा सकता है।
      हमारे द्वारा हुआ पेड़ों का नुकसान 10-12 साल में पूरा हो सकता है
      क्योकि पेढ़ो का नवीनीकरण संभव है
      परंतु भूमि(अर्थ)अर्थात् मिट्टी का नहीं
      शरीर पंच तत्व में इस प्रकार विलीन होता है।-
      आग के द्वारा ----------अग्नि में
      जलने के समय धुआं------ वायु और आकाश
      जलने के वाद भस्म का कुछ भाग- पृथ्वी में(मिट्टी)
      अस्थियां ---------------जल में


      अब आप के लिखने एवं भाषा(बोली)से स्पष्ट होता है कि आपने सनातन धर्मियों का उपहास कर रहे हैं।

      हटाएं
  22. @ रचना जी,

    ज़रा आप ये भी बता दे....की ज़मीन की ज़्यादा ज़रुरत है या पेडॊं की????

    एक चिता जलाने के लिये 300-400 किलो लकडी लगती है और इतनी लकडी अगर सिर्फ़ एक पेड से भी ली जाये तो उस पेड की उम्र कम से कम 15-20 या कम से कम 10 साल होनी चाहिये......

    जबकि कब्र में दफ़नायें गये इंसान के जिस्म को गलने और मिट्टी में मिलने के लिये सिर्फ़ 7-8 महीने ही चाहियें....

    तो किसने नुकसान ज़्यादा किया.....??????

    उत्तर देंहटाएं
  23. @ प्रवीण शाह जी, आपकी बात से सहमत हुं की ये देशभक्ति या देशप्रेम का पैमाना नही है ठीक इसी तरह "वन्देमातरम" कहना या गाना देशभक्ति या देशप्रेम का पैमाना नही है.....

    अगर आपकी निगाह में ये कुतर्क है तो कुतर्क ही सही....

    उत्तर देंहटाएं
  24. @ धीरु सिंह जी, सारे ८६% देशभक्त है क्या???

    अगर होते तो हमारे देश के ये हालात होते क्या????

    उत्तर देंहटाएं
  25. @ अनुनाद सिंह जी,

    मैनें सातंवी क्लास में इंग्लिश मिडियम की पढाई छोड दी थी और क्यौं छोडी थी वो आप मेरा पिछ्ला लेख पढकर जान सकते है...

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/11/no-indian-muslim-is-patriostic.html

    आपने मेरे मज़हब के बारें मे तो बता दिया...कुछ बातें गलत कही है लेकिन मैं आपको सुधारुंगा नही क्यौंकि आप सुधरने वालों में से नही हो....

    ये सब प्रथाए है तो "धर्म" क्या है...ज़रा बता देते तो अच्छा होता....

    हर दर पर सर झुकाना, तैंतींस करोड देवता कम पड गये पुजने के लिये तो....इंसानो को पुजना, दरगाहों पर चादर चढाना, कही से भी मिलें बस मुराद पुरी होनी चाहिये......शायद ये "धर्म" है

    उत्तर देंहटाएं
  26. @ सिध्दार्थ शंकर त्रिपाठी जी,

    कुछ चुबा ना....तकलीफ़ हुई?? अजीब सा लगा?? बहुत गुस्सा आया??

    आप लोग हमसे वो काम करने को कहो जो इस्लाम में, हमारे मज़हब में नही है तो वो सही है....

    मैनें कुछ सवाल कर लियें तो वो बकवास हो गयी....ये तो सरासर भेदभाव है...एक तराज़ु में तोलो हमें भी और अपने आप को भी....

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  27. आप गलत अर्थ लगा रहे है मेरा मतलब हिन्दू मुसलमान से था नाकि देशभक्त या देश द्रोही से . वह १००%गलत या कहे समाज के दुश्मन है जो मुस्लिमो को गद्दार की उपमा देते है मुस्लिम भी उतने ही देश भक्त जितने कोई और . क्या हिन्दू में गद्दार नहीं देश द्रोही नहीं . कृपया अन्यथा ना ले लेकिन एक मछली तालाब को गन्दा कर देती है वह हमारे यहाँ भी है आपके यहाँ भी . दोनों ओर की सफाई जरुरी है हमारे आगे आने वाली नस्लों के लिए जो इस जहर से बची रहे

    उत्तर देंहटाएं
  28. @ सैयद साहब ये बकवास नही है...ये एक तरीका है कुछ लोगों को उनकी भाषा में समझाने का....

    कुछ कुतर्क करने वालों को सिर्फ़ कुतर्क ही समझ में आते है इसलिये.....उनकी भाषा में उन्हे जवाब दिया है...


    @ अम्रतपाल सिंह जी,

    क्या करें जी....कोई ठीक से लिखने नही देता है...जब गलत पढता हूं तो बर्दाशत नही होता है...

    जिसको देखो ज़बरदस्ती कर रहा है कि "वन्देमातरम" गाना पडेगा....वर्ना ये देश छोडकर जा सकते हो...गद्दार हो, वगैरह वगैरह....

    उत्तर देंहटाएं
  29. आप सभी दिमाग से पैदल, संकीर्ण, देशद्रोही और

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  30. साम्प्रदायिक लोग ऐसी फालतू साइटों पर समय गँवाने के बजाय यहाँ जाकर लेख क्यों नहीं पढ़ते?

    हर्फ़-ए-ग़लत (उम्मी का कलाम)

    पढिए और समझिए कि सभ्यता के शत्रुओं की वास्तविकता क्या है !

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  31. आपके दुख को समझता हूँ काशिफ जी। लेकिन अगर अपने देश के नाते वन्देमातरम गा ही लेंगे तो क्या बिगड जायेगा। भई ये देश आपका अपना है। फिर देश को थोडा सम्मान देना कोई ग़लत नहीं।
    आपके ज़वाब का इन्तज़ार रहेगा।

    उत्तर देंहटाएं
  32. बेटा तू अनूखा है, बढिया आगरे वाले फटके मारे हैं, अब अलबेला तेरे सामने है, हमारा आशिर्वाद दोनों के साथ है यह सब जाने है, कुछ शाइरी वाइरी जानो हो? आगरा के हो ना कहोगे तो अच्‍छा नहीं लगेगा, नहीं जानो तो रदीफ काफिया तुकबंदी समझ लो, जरूरत पडेगी,
    ब्लागवाणी पर आज तुम्‍हारे नाम का चैलेंज टंगा है महान ब्लागर घुच्‍ची से खेलेगा आखिर उसके पास ब्लागवाणी का डंडा जो नहीं है,
    देख लो महान ब्लागर Page Rank-3 में पहुंच गया और असल अवधिया के अलावा हिन्‍दू या मुसलमान किसी ने बधाई ना दी,

    अवधिया चाचा
    जो कभी अवध ना गया

    उत्तर देंहटाएं
  33. मैं रज़िया जी की बहुत इज्ज़त करता हूँ उन्ही के वजह से 'हमारी अंजुमन' तक पहुंचा था.
    http://hamarianjuman.blogspot.com/2009/11/no-indian-muslim-is-patriostic.html

    इस मामले पर पहले भी मैंने एक टिपण्णी किया था. और मुझे काशिफ आरिफ जी ने एक संतोषजनक जवाब दिया था. जिसके मूल में यही पता चलता है की हमे (सीधे सादे लोग को) अक्सर चालु राजनेताओं और कुछ अवैज्ञानिक सोच रखने वाले उलेमाओं द्वारा मुसलसल परेशान किया जा रहा हैं. अतः: विरोध उन असामाजिक तत्वों का अनिवार्य है जिनको हमने अपना नेता बना रखा है. यहाँ ब्लॉग पर तीव्र बहस करने की कोई जरुरत नहीं है. व्यर्थ के वाद-विवाद देखकर फिर दुखी हो आया हूँ.

    इस ब्लॉग का टाइटिल पढ़कर मैं कुछ सिखने की जिज्ञासा से यहाँ आया था. यहाँ अन्दर देखता हूँ तो पता चलता है की उन्वान कुछ और है और मजमून दिशाहीन है. शायद हिंदी ब्लॉग जगत का स्वर्णकाल समाप्त हो गया है. ये सब T.R.P. का मामला लग रहा है. हमलोग पहले से ही टेलीविजन मीडिया वाले से परेशान हो चुके थे 'वे T.R.P. और नंबर 1 की दौड़ में कुछ भी पडोसने लग गए है.' अब ब्लॉग जगत में भी यही होने लगा है.

    आप कहते हैं की "कुछ लोगों को उन्ही की भाषा में सिखाना जरुरी है" यह जानते हुए की वो सीखना नहीं चाहते. नफरत की भाषा से अगर सफलता मिलने की गुंजाईश है तो लगे रहिये. अपना अनुभव यही कहता है की "सिरफ नुक्सान और हाहाकार ही मिलेगा". इस तुफैल में जो जरुरी मुद्दे हैं, पाक कुरआन की आयतें, उनका मतलब, इस्लाम धर्म की अच्छी बातें आदि कहीं गुम सी लगती है. उन पन्नों और कड़ियों को हाईलाइट करने की जरुरत है ना की कीबोर्ड पर व्यर्थ ही अपनी ऊर्जा गंवाने की.

    यदि आपलोगों (मुआफी चाहूँगा किसी को जानता नहीं हूँ...आरिफ जी की) की यही मंशा(यही बहस, T.R.P. और नंबर 1 वाला) है तो ठीक है आप लोग लगे रहिये. मैं आईंदा इस ब्लॉग पर नहीं आऊंगा. जहाँ मेरी आत्मा आहत हो और जुबान में जहर फैलने का खतरा हो, उस स्थान से दूर रहने में ही भलाई है.

    Good Bye and Happy Bloging :) - सुलभ

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  34. सुलभ जी,

    आपको मेरे ब्लाग पर आकर कुछ निराशा हुई उसके लिये मैं माफ़ी चाहता हूं....आपने कहा कि वो लोग समझेंगे नही ठीक है मैं आपकी बात मानता हूं लेकिन कभी-कभी दिल की भडास भी निकालनी ज़रुरी होती है....

    मैने इस ब्लाग का इस्तेमाल आज से पहले इस काम के लिये क्भी नही किया है आप जो इरादा लेकर इस ब्लाग पा आये थे इन्शाल्लाह वो ज़रुर पुरा होगा....आपने सिर्फ़ एक लेख को पढकर गलत अन्दाज़ा लगाया है...इस ब्लाग पर हमेशा अच्छी बातें हुई है और इन्शाल्लाह आगे भी होती रहेंगी...

    इस ब्लाग के कुछ लेख यहां मौजुद है...पढें और अपनी राय ज़ाहिर करें


    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/08/786-786-does-not-mean-bismillah-myth-of.html

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/06/mp3.html

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/09/what-is-shabe-baarat-reality-of-shabe.html

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/06/3.html

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/07/blog-post_12.html

    उत्तर देंहटाएं
  35. @ अम्रत पाल सिंह जी,

    हम राष्टगान बडे फ़र्ख से गाते है....तिरंगे को सलामी देते है....मोर को बाइज़्ज़त राष्टीय पक्षी मानते है....मेरी बात को समझने के लिये ये दो लेख आप पढ सकते है...

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/11/as-in-hindu-sanatan-religion-to-make.html

    http://qur-aninhindi.blogspot.com/2009/11/aziz-burney-final-shots-vande-matram.html

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  36. "मैं मानता हूं की हम उस जगह को घेर लेते है 7-8 महीनों में जिस्म ज़मीन में मिल जाता है

    लेकिन तुम्हारे यहां जब जलाया जाता है तो एक चिता में 300-400 किलों लकडी जलाई जाती है... अब ये लकडी लाने के लिये 10-12 साल पुराना पेड काटा जाता है, फ़िर चिता की आग का प्रदुषण जो बरसों तक हवा में रहता है,

    मतलब हम जब इस दुनिया से जाते है तो हमारे निशान 7-8 महीने मे खत्म हो जाते है......

    लेकिन जब आप जाते हो तो तुम्हारे बरसों तक रहते है, सबसे बडा नुकसान तो पेड काटकर कर जाते हो जिसको भरने के लिये 10-12 साल चाहियें......"

    you have told the above but don't you know that "Kabragah" is always made on land and I think it require to cut 2-3 tree for grave of a person and on a place you can't create grave of others. Don't you think that in the present time Land is more important. And you said that the body dissolved in 7-8 months but still capture that place. nice thing...

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  37. One thing more to say "You have told that your grave is created in the land so you respect more." I said what about the terrorist who came here and there graves are created here after death, nice way to love and respect. Very Nice explanation to bash a religion. Use more scientific cause unless it will harm your community itself.

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  38. Sawal sirf itana hai ki ....Chahe Hindu ho yaa muslim ..maa ko to har koi pujata hai.kisi Allah,kisi bhagwan ne apni maa ki bandagi ko galat nahi thaharaya hai..kya muslim kadam bosi nahi karte aapni maa ki.Agar wo dargaho me jiyarat kar sakte hai, nohe or marsiye padh sakte hai or to or Allah ki shan me Natita kalam or qwalee gaa sakte hai.to jis mitti me janma us ki stuti kyo nahi kar sakta...?

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  39. Jo cheez dhundhte hue is blog par aai thi wo to mili nahi..balki lagta hai ki lekhak sahab khud rudhiwadita me uljhe hai.Main Har dharm ki izzat karti hu .Quran ko janane ki chah le kar is blog par aai . par yaha to arop pratyarop ho rahe hai..Is tuchchh mansikta ke khol se bahar nikale bina aap kya Quran paak ke baare me hame bataenge?????rahane dijiye ye aapke bas ka nahi...

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आपको लेख कैसा लगा:- जानकारी पूरी थी या अधुरी?? पढकर अच्छा लगा या मन आहत हो गया?? आपकी टिप्पणी का इन्तिज़ार है....इससे आपके विचार दुसरों तक पहुंचते है तथा मेरा हौसला बढता है....

अगर दिल में कोई सवाल है तो पुछ लीजिये....

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