बहुत दिनों से मैं इस सवाल का जवाब ढुंढ रहा था, बहुत से मौलानाओं से बात की, शहर काज़ी जी से बात की, कुरआन और हदीसों को तलाशा, फ़िर आखिर में कई दारुल ऊलुम में खत भेजा कुछ सवाल लिख कर लेकिन कुछ जवाब नही मिला। मेरे घर का नेट कनेक्शन काफ़ी दिन से बन्द था इसके मुत्तालिक मैनें एक लेख भी लिखा था "हमारा हिन्दुस्तान" पर।
उस दिन अचानक मुझे "हमारी अन्जुमन" पर ये लेख मिला तो बशुक्रिया मैं ये लेख आप लोगो के सामने रख रहा हूं।
आज हमारी मस्जिदों और घरों में चाँद तारे का ये निशान आम है। आज के मुस्लिम इस निशान को इस्लाम का निशान समझते हैं और लोग भी ऐसा ही मानने लगे हें। अब ये माना जाता है कि जैसे ईसाइयों का निशान क्रास है, हिन्दुओं का निशान ओम या स्वास्तिक है इसी तरह मुसलमानों का निशान चाँद तारा है, आज शायद ही कोई मस्जिद ऐसी हो जिसके गुम्बद या मीनार की चोटी पर चाँद तारे का ये निशान मौजूद न हो।मैने इस बारे में सोचा और इस बात पर शोध किया कि क्या वाकई ये निशान इस्लाम के पैगम्बर का है या अल्लाह के दीन से इसका कोई ताल्लुक है ।
शनिवार, 3 अक्टूबर 2009
सोमवार, 21 सितंबर 2009
सब हिन्दी ब्लोग्गर्स को ईद-उल-फ़ितर की दिली मुबारकबाद..!!! Happy Eid-Ul-Fitr To ALL Hindi Blogger's
आज ईद-उल-फ़ितर है! "आप सब हिन्दी ब्लोग्गर्स को ईद-उल-फ़ितर की दिली मुबारकबाद"
रमज़ान के पाक महीने में रोज़े का तप करने के बाद आज सारे मुसलमानों को उनके रोज़ों और इबादत का सवाब मिलेगा। अल्लाह ने वादा किया है "कि मैं ईद-उल-फ़ितर के दिन रमज़ान के महीने में की गयी हर इबादत का अज़्र ईदगाह में दुंगा।"
लोग अपने घर की औरतों को ईदगाह में नही ले जाते है कहते है की "औरतों का मस्जिद में जाना मना है" लेकिन "उन्हे ईदगाह ले जाना चाहिये क्यौंकि रोज़े उन्होने भी रखें है और उन्हें भी अपने रोज़ो का अज्र लेने का हक है।" मुस्लमान वो भी है, नमाज़ उन पर भी फ़र्ज़ है और मस्जिद नमाज़ पढने की जगह है तो औरतों वो मस्जिद में नमाज़ पढने से कोई नही रोक सकता है।
ज़्यादा जानकारी और हदीसों के लिये मेरा ये लेख पढें
"इस तस्वीर में आप देख सकते है की ये औरतें ईद की नमाज़ अता कर रही है" (ये तस्वीर कहां की है मुझे इसकी जानकारी नही मिल सकी उसके लिये माफ़ी चाहता हूं)
मुसलमानों जिस तरह ये महीना आपने तकवे और परहेज़गारी से गुज़ारा है इस तकवे और परहेज़गारी को आगे भी जारी रखें। अकसर आम दिनों में मौलवी शिकायत करते हैं की "नमाज़ के वक्त मस्जिदें खाली रहती है।" माशाल्लाह रमज़ान के दिनों में मस्जिदों में पैर रखने की जगह नही होती है और हर साल की तरह इस साल भी यही आलम था "मेरी सारे मुसलमानों से गुज़ारिश है की नमाज़ की पाबंदी को बनाये रखें और हमारी मस्जिदों को आबाद रखें, एक दुसरे को नमाज़ के लिये बुलायें, घर से या दुकान से जब नमाज़ के लिये निकलें तो अपने पडोसी, अपने दोस्त, अपने कारोबारी को नमाज़ के लिये बुलायें।"
अल्लाह आप सबकी ज़कात, सदका, रोज़े, नमाज़ और इबादत को कुबुल करें और आपको साबित ईमान रखें।
अगर लेख पसंद आया हो तो इस ब्लोग का अनुसरण कीजिये!!!!!!!!!!!!!
"इस्लाम और कुरआन"... के नये लेख अपने ई-मेल बाक्स में मुफ़्त मंगाए...!!!!
रमज़ान के पाक महीने में रोज़े का तप करने के बाद आज सारे मुसलमानों को उनके रोज़ों और इबादत का सवाब मिलेगा। अल्लाह ने वादा किया है "कि मैं ईद-उल-फ़ितर के दिन रमज़ान के महीने में की गयी हर इबादत का अज़्र ईदगाह में दुंगा।"
लोग अपने घर की औरतों को ईदगाह में नही ले जाते है कहते है की "औरतों का मस्जिद में जाना मना है" लेकिन "उन्हे ईदगाह ले जाना चाहिये क्यौंकि रोज़े उन्होने भी रखें है और उन्हें भी अपने रोज़ो का अज्र लेने का हक है।" मुस्लमान वो भी है, नमाज़ उन पर भी फ़र्ज़ है और मस्जिद नमाज़ पढने की जगह है तो औरतों वो मस्जिद में नमाज़ पढने से कोई नही रोक सकता है।
ज़्यादा जानकारी और हदीसों के लिये मेरा ये लेख पढें
"इस तस्वीर में आप देख सकते है की ये औरतें ईद की नमाज़ अता कर रही है" (ये तस्वीर कहां की है मुझे इसकी जानकारी नही मिल सकी उसके लिये माफ़ी चाहता हूं)
अल्लाह आप सबको कुरआन और हदीस को पढकर, सुनकर, उसको समझने की और उस पर अमल करने की तौफ़िक अता फ़र्मायें।
आमीन, सुम्मा आमीन
अगर लेख पसंद आया हो तो इस ब्लोग का अनुसरण कीजिये!!!!!!!!!!!!!
"इस्लाम और कुरआन"... के नये लेख अपने ई-मेल बाक्स में मुफ़्त मंगाए...!!!!
Labels:
अल्लाह,
इस्लाम,
ईद मुबारक हो,
ईद-उल-फ़ितर,
Allah,
Islam
रविवार, 20 सितंबर 2009
"फ़ितरा" क्या है?? "फ़ितरा" कब देना चाहिये??? What Is Fitra?? When You Can Give Fitra??
आज रमज़ान का २९वां रोज़ा था... ०६ : ४५ हो चुके है अभी चांद की कोई खबर नही आयी है..। देखते है की कब खबर आती है। ईद का चांद दिखने के बाद "फ़ितरा" दिया जाता है..जिसकी वजह से इस ईद को ईद-उल-फ़ितर कहते है।
कुछ हिन्दु इसे पितरों की ईद कहते है....पढे ये लेख...
अकसर लोग सवाल करते है की फ़ितरा कितना देना चाहिये?? फ़ितरा कब निकालना चाहिये?? फ़ितरा किस-किस पर फ़र्ज़ है???
फ़ितरा क्या है??
फ़ितरा रमज़ान के रोज़े पुरे होने के बाद यानि ईद का चांद दिखने के बाद दिया जाता है। ये एक तरह का सदका (दान) है जो हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है चाहे वो बच्चा हो, बुढा हो, औरत हो या लडकी हो। हर मुसलमान को हर हाल में फ़ितरा देना चाहिये।
कुछ हिन्दु इसे पितरों की ईद कहते है....पढे ये लेख...
अकसर लोग सवाल करते है की फ़ितरा कितना देना चाहिये?? फ़ितरा कब निकालना चाहिये?? फ़ितरा किस-किस पर फ़र्ज़ है???
फ़ितरा क्या है??
फ़ितरा रमज़ान के रोज़े पुरे होने के बाद यानि ईद का चांद दिखने के बाद दिया जाता है। ये एक तरह का सदका (दान) है जो हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है चाहे वो बच्चा हो, बुढा हो, औरत हो या लडकी हो। हर मुसलमान को हर हाल में फ़ितरा देना चाहिये।
Labels:
अल्लाह,
इस्लाम,
फ़ितरा क्या है,
Allah,
Islam,
What Is Fitra
शुक्रवार, 18 सितंबर 2009
ज़कात किसको देनी चाहिये?? Who deserve your "Zakaat"???
रमज़ान का आखिरी अशरा (हिस्सा) चल रहा है इस अशरे में सब मुसलमान अपनी साल भर की कमाई की ज़कात निकालते है। ज़कात क्या है??? कुरआन मजीद में अल्लाह ने फ़र्माया है :- "ज़कात तुम्हारी कमाई में गरीबों और मिस्कीनों का हक है।" ज़कात कितनी निकालनी चाहिये ये काफ़ी बडा मुद्दा है इस मसले पर बहुत सारे इख्तिलाफ़ है, कोई इन्सान कुछ कहता है और कुछ कहता है| इस मसले पर हम विस्तार से बाद में बात करेंगे।
ज़कात निकालने के बाद सबसे बडा जो मसला आता है वो है कि ज़कात किसको दी जाये???
ज़कात देते वक्त इस चीज़ का ख्याल रखें की ज़कात उसको ही मिलनी चाहिये जिसको उसकी सबसे ज़्यादा ज़रुरत हो...वो शख्स जिसकी आमदनी कम हो और उसका खर्चा ज़्यादा हो। अल्लाह ने इसके लिये कुछ पैमाने और औहदे तय किये है जिसके हिसाब से आपको अपनी ज़कात देनी चाहिये। इनके अलावा और जगहें भी बतायी गयी है जहां आप ज़कात के पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सबसे पहले ज़कात का हकदार है :- "फ़कीर"
फ़कीर कौन है?? फ़कीर वो शख्स है जिसकी आमदनी 10,000/- रुपये सालाना है और उसका खर्च 21,000/- रुपये सालाना है यानि वो शख्स जिसकी आमदनी अपने कुल खर्च से आधी से भी कम है तो इस शख्स की आप ज़कात 11,000/- रुपये से मदद कर सकते है।
ज़कात निकालने के बाद सबसे बडा जो मसला आता है वो है कि ज़कात किसको दी जाये???
ज़कात देते वक्त इस चीज़ का ख्याल रखें की ज़कात उसको ही मिलनी चाहिये जिसको उसकी सबसे ज़्यादा ज़रुरत हो...वो शख्स जिसकी आमदनी कम हो और उसका खर्चा ज़्यादा हो। अल्लाह ने इसके लिये कुछ पैमाने और औहदे तय किये है जिसके हिसाब से आपको अपनी ज़कात देनी चाहिये। इनके अलावा और जगहें भी बतायी गयी है जहां आप ज़कात के पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सबसे पहले ज़कात का हकदार है :- "फ़कीर"
फ़कीर कौन है?? फ़कीर वो शख्स है जिसकी आमदनी 10,000/- रुपये सालाना है और उसका खर्च 21,000/- रुपये सालाना है यानि वो शख्स जिसकी आमदनी अपने कुल खर्च से आधी से भी कम है तो इस शख्स की आप ज़कात 11,000/- रुपये से मदद कर सकते है।
Labels:
अल्लाह,
इस्लाम,
ज़कात किसको देनी चाहिये,
जिहाद,
Allah,
Islam,
Jihad,
Who-deserve-your-zakat
सदस्यता लें
संदेश (Atom)

"



