(नोट :- सबसे पहले मैं अपने रेगुलर ई-मेल रीडर से माफ़ी चाहता हूं की मैं एक महीने से कोई लेख नही लिख सका। बिजली की कमी और दुसरे कामों की वजह से मैं लिख नही सका। रमज़ान के इस पाक महीने मेरे सारे लेख मुसलमानों के बीच रमज़ान को लेकर फ़ैली गलतफ़हमियों को दुर करने पर केंन्द्रित रहेंगे)
मुसलमानों के बीच में ये आम धारणा है कि "बिस्मिल्लाह" के बदले हम 786 लिख सकते है और दोनो के मायने एक ही है। ये धारणा दुनिया में सबसे ज़्यादा हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार तथा बांग्लादेश में ज़्यादा है। यहां पर बहुत आम तौर पर दुकानों, घरों की दीवारों तथा दरवाज़ों पर आपको "७८६" लिखा मिल जायेगा, बच्चों की किताबों, इम्तिहान की कापी पर लिखा मिल जायेगा। बहुत से मुसलमान "७८६" को तावीज़ के तौर पर गले मे पहनते हैं और इन तीन अंको को शुभ मानते है।
इस विषय पर आप किसी अगर बात करेंगे तो हर शख्स की अलग राय होगी।
पहला तर्क :-
कुछ लोग कहते है की अल्लाह के रसुल सल्लाहो अलैहि वस्सलम (PBUH) ७८६ ईंसंवी में मक्का से निकल कर मदीना गये थे तो इस्लाम मक्का से निकल कर बाहर फ़ैला था इसलिये "७८६" का मतलब "बिस्मिल्लाह" है लेकिन ये सही नही है क्यौंकी अल्लाह के रसुल सल्लाहो अलैहि वस्सलम के आने पहले भी बहुत से नबी और पैगम्बर दुनिया में उतारे जा चुके थे जिन्होने इस्लाम को फ़ैलाया था।
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सोमवार, 24 अगस्त 2009
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