बुधवार, 18 अगस्त 2010

इस्लामी अकीदे से जुडें कुछ सवाल भाग - 1, Islam, Allah, Muslim, Jihad, Namaz, Pray, Ibadat,

आज आप लोगों के सामने मैं कुछ सवाल रख रहा हूं जो अकसर मुस्लिम और गैर-मुस्लिम भाई इस्लाम के विषय में पुछते है। हर सवाल के जवाब से साथ कुरआन और हदीस से दलील भी पेश की गयी..।
                         1.

सवाल :-     अल्लाह तआला ने हमें किस लिये पैदा किया है ?

जवाब :-     अल्लाह ने हमें सिर्फ़ अपनी इबादत के लिये पैदा किया है।

कुरआन से दलील :-    मैंने इंसानों और जिन्नातों को सिर्फ़ अपनी इबादत के लिये पैदा किया है । (सूरह 
                                    अज़्ज़ारियात सु. 51 : आ. 56 )

हदीस से दलील :-       बन्दों पर अल्लाह तआला का हक यह है कि वह उसकी इबादत करें और उसके साथ
                                    किसी को शरीक न करें । (मुत्तफ़क अलैह)



मंगलवार, 27 जुलाई 2010

शबे-बारात क्या है? शबे- बारात की हकीकत?? What Is Shabe-Baarat?? Reality Of Shabe-Baaraat?? Revised

आज शबे-बारात है..यानी पन्द्रह शअबान आज पुरे हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बडे ज़ोर शोर से शबे-बारात मनायी जायेगी। ये त्योहार अधिकतर मुसलमान बहुत धुम-धाम से मनाते है। इस त्योहार को कुछ हिन्दु शिव की बारात से मिलाते हैं पढें सुरेश चिपलूनकर द्वारा लिखा गया ये लेख।




ये लेख मैनें पिछले साल लिखा और छापा था आज इसको शबे-बारात के मौके पर दुबारा छाप रहा हूं ताकि पिछ्ले साल जिन लोगों ने इसे ना पढा हो वो भी इसे पढ लें।

"शबे-बारात की हकीकत"
 "पन्द्र्ह शअबान की हकीकत"

 (याद रहे बिदअत गुनाहे कबीरा (सबसे बडा गुनाह) है। बिदअत से शैतान खुश होता है और अल्लाह की नाराज़गी हासिल होती है। बिदअत का रास्ता जहन्नुम की तरफ़ जाता है। लिहाज़ा तमाम मुसलमानों को बिदआत से बचना चाहिये।)

रविवार, 11 जुलाई 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग-5 Short Life Story Of Allah's Messenger Mohammad

 पिछ्ले भाग-1,  भाग-2,   भाग-3  और  भाग-4   से जारी.........


साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बेटे-बेटियां

1. कासिम :-  यह आपकी पहली औलाद हैं । आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
                      कुन्निय्यत "अबुल कासिम" इन्ही के नाम पर है । हज़रत खदीजा से पैदा हुये । पांव-पांव चलना सीख गये थे कि इन्तिकाल कर गये ।

2.  अब्दुल्लाह :-   यह भी हज़रत खदीजा से हैं । इनका लकब "तय्यब" और "ताहिर" था । नबुव्वत के बाद पैदा
                             हुये । इन्हीं के देहान्त पर सूर: कौसर नाज़िल हुयी । मक्का में बचपन में देहान्त हुआ ।

गुरुवार, 11 मार्च 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग-4 Short Story Of Allah's Messanger

पिछ्ले  भाग-1,   भाग-२,   और   भाग-3   से जारी.........

आपकी बीवियां (मुसलमानों की माएं)

1.    हज़रत खदीजा  :-    इनका पहला निकाह "अतीक" से हुआ, इनसे तीन लडके पैदा हुये । उनके देहान्त के
                                        बाद अबू "हाला" से । इनके बाद जुबैर बिन मुतईम के बेटे से तीसरा निकाह होना तय था, लेकिन बात नहीं बनी और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तीसरा निकाह किया । चचा अबू तालिब ने निकाह पढा । 20  ऊंट महर (निकाह के वक्त औरत या पत्नी को दी जाने वाली राशि या जो आपकी हैसियत में हो) के मुकर्र्रर हुये । निकाह से समय आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आयु 25  वर्ष और खदीजा की उम्र 40  वर्ष थी । 65  वर्षे की उम्र में 10  नबुव्वत में इन्तिकाल हुआ । इनको दफ़न करने के लिये आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स्वंय कब्र में उतरे । उस समय तक जनाज़ा की नमाज़ नहीं थी । (रज़ियल्लाहु अन्हा)

2.  हज़रत सौदा  :-     इनका पहला निकाह "सकरान" से हुआ । नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 50  वर्ष की उम्र में खदीजा के इन्तिकाल के बाद इन  50  वर्षीय महिला से निकाह किया । इनके पिता हज़रत ज़मआ ने स्वंय निकाह पढा और 400  दिरहम महर के मुकर्र्रर किये । 72  वर्ष की उम्र में मदीन में दुसरे खलीफ़ा के ज़माने में इन्तिकाल हुआ । (रज़ियल्लाहु अन्हा)
Related Posts with Thumbnails