रविवार, 11 जुलाई 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग-5 Short Life Story Of Allah's Messenger Mohammad

 पिछ्ले भाग-1,  भाग-2,   भाग-3  और  भाग-4   से जारी.........


साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बेटे-बेटियां

1. कासिम :-  यह आपकी पहली औलाद हैं । आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
                      कुन्निय्यत "अबुल कासिम" इन्ही के नाम पर है । हज़रत खदीजा से पैदा हुये । पांव-पांव चलना सीख गये थे कि इन्तिकाल कर गये ।

2.  अब्दुल्लाह :-   यह भी हज़रत खदीजा से हैं । इनका लकब "तय्यब" और "ताहिर" था । नबुव्वत के बाद पैदा
                             हुये । इन्हीं के देहान्त पर सूर: कौसर नाज़िल हुयी । मक्का में बचपन में देहान्त हुआ ।

गुरुवार, 11 मार्च 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग-4 Short Story Of Allah's Messanger

पिछ्ले  भाग-1,   भाग-२,   और   भाग-3   से जारी.........

आपकी बीवियां (मुसलमानों की माएं)

1.    हज़रत खदीजा  :-    इनका पहला निकाह "अतीक" से हुआ, इनसे तीन लडके पैदा हुये । उनके देहान्त के
                                        बाद अबू "हाला" से । इनके बाद जुबैर बिन मुतईम के बेटे से तीसरा निकाह होना तय था, लेकिन बात नहीं बनी और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से तीसरा निकाह किया । चचा अबू तालिब ने निकाह पढा । 20  ऊंट महर (निकाह के वक्त औरत या पत्नी को दी जाने वाली राशि या जो आपकी हैसियत में हो) के मुकर्र्रर हुये । निकाह से समय आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आयु 25  वर्ष और खदीजा की उम्र 40  वर्ष थी । 65  वर्षे की उम्र में 10  नबुव्वत में इन्तिकाल हुआ । इनको दफ़न करने के लिये आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम स्वंय कब्र में उतरे । उस समय तक जनाज़ा की नमाज़ नहीं थी । (रज़ियल्लाहु अन्हा)

2.  हज़रत सौदा  :-     इनका पहला निकाह "सकरान" से हुआ । नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने 50  वर्ष की उम्र में खदीजा के इन्तिकाल के बाद इन  50  वर्षीय महिला से निकाह किया । इनके पिता हज़रत ज़मआ ने स्वंय निकाह पढा और 400  दिरहम महर के मुकर्र्रर किये । 72  वर्ष की उम्र में मदीन में दुसरे खलीफ़ा के ज़माने में इन्तिकाल हुआ । (रज़ियल्लाहु अन्हा)

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग - 3 Short Life Story Of Allah's Messanger Mohammad - 3

पिछ्ले  भाग-1,  और  भाग-2  से जारी.........

कुबा पहुंचना :-    8 रबीउल अव्वल 13 नबुव्वत, पीर (सोमवार) के दिन (23 सितंबर सन 622 ईंसवीं) को
                           आप कुबा पहुंचें । आप यहां 3 दिन तक ठहरे और एक मस्ज़िद की बुनियाद रखी । इसी साल बद्र की लडाई हुयी । यह लडाई 17 रमज़ान जुमा के दिन गुयी । 3 हिजरी में ज़कात फ़र्ज़ हुयी । 4 हिजरी में शराब हराम हुयी । 5 हिजरी में औरतों को पर्दे का हुक्म हुआ ।

उहुद की लडाई :-  7  शव्वाल 3 हिजरी को सनीचर (शनिवार) के दिन यह लडाई लडी गयी । इसी लडाई में
                             रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के चन्द सहाबा ने नाफ़रमानी की, जिसकी वजह से कुछ दे के लिये पराजय का सामना करना पडा और आपके जिस्म पर ज़ख्म आये।

बुधवार, 13 जनवरी 2010

साहिबे-कुरआन मुह्म्मदुर्रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का संक्षिप्त जीवन परिचय भाग-2 Short Life Story Of Allah's Messanger Mohammad


गारे-हिरा में इबादत :-  हज़रत खदीजा से शादी के बाद आप घरेलू मामलों से बेफ़िक्र हो गये। पानी और सत्तू
                                       साथ ले जाते और हिरा पहाडी के गार (गुफ़ा) में दिन-रात इबादत में लगे रहते। मक्का शहर से लगभग तीन मील की दूरी पर यह पहाडी पर स्थित है और आज भी मौजुद है। हज़रत खदीजा बहुत मालदार थी इसलिये आपकी गोशा-नशीनी (काम/इबादत/ज़िन्दगी) में कभी दखल नही दिया और न ही तिजारत का कारोबार देखने पर मजबूर किया बल्कि ज़ादे-राह (रास्ते के लिये खाना) तय्यार करके उनको सहूलियत फ़रमाती थीं।

समाज-सुधार कमेटी :- हिरा के गार में इबादत के ज़माने में बअसर लोगों की कमेटी बनाने का मशवरा आप
                                       ही ने दिया था और आप ही की कोशिशों से यह कमेटी अमल में लायी गयी थी। इस कमेटी का मकसद यह था कि मुल्क से फ़ितना व फ़साद खत्म करेंगे, यात्रियों की सुरक्षा करेंगे और गरीबों की मदद करेंगे।
Related Posts with Thumbnails